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ठाकुरगंज नगर पंचायत में पिछले तीन वर्षों में हुए सभी कार्यों की निष्पक्ष जांच हो – भाजपा प्रवक्ता कौशल किशोर यादव।

सारस न्यूज़, ठाकुरगंज।

ठाकुरगंज नगर पंचायत में संचालित विभिन्न विकास योजनाओं में गंभीर अनियमितताओं और व्यापक भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। यह आरोप सोशल मीडिया एवं समाचार पत्रों के माध्यम से सामने आने के साथ ही स्थानीय स्तर पर किए गए अवलोकन के आधार पर लगाए गए हैं। आरोप है कि कई योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव है, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है। मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता कौशल किशोर यादव ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, वार्ड संख्या 09 में राम बाबू साह के घर से पिंटू के घर तक पीसीसी सड़क निर्माण कार्य कागजों में पूर्ण दिखाया गया है, जबकि स्थल पर कार्य नहीं हुआ। इसके बावजूद लगभग 4 लाख रुपये से अधिक की राशि की निकासी कर ली गई, जिसे स्पष्ट रूप से वित्तीय अनियमितता बताया गया है।

इसके अलावा कई स्थानों पर बिना स्वीकृत प्राक्कलन (Estimate) एवं योजना सूचना पट लगाए सड़क निर्माण कार्य किए जाने की शिकायत सामने आई है, जिसे नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है। जल-नल योजना में भी भारी गड़बड़ी का आरोप है, जहां नगरवासियों को नियमित एवं स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं कराया जा रहा, बावजूद इसके हर माह लाखों रुपये की निकासी हो रही है।

प्रेस विज्ञप्ति में यह भी उल्लेख है कि पिछले तीन वर्षों में किए गए सभी विकास कार्यों की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराए जाने की आवश्यकता है, ताकि कार्यों की गुणवत्ता और वित्तीय पारदर्शिता का वास्तविक आकलन किया जा सके।सफाई व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि सफाई एजेंसी को प्रति माह लगभग 13 लाख रुपये का भुगतान किया जाता है, जबकि जमीनी स्तर पर केवल 20-25 कर्मचारी ही कार्यरत पाए जाते हैं, जबकि अनुबंध के अनुसार कम से कम 100 सफाई कर्मियों की तैनाती आवश्यक है।

राजस्व हाट निर्माण में भी नियमों की अनदेखी का आरोप है। बताया गया कि 15 लाख रुपये तक के कार्य विभागीय स्तर पर कराए जा सकते हैं, लेकिन ठाकुरगंज में करोड़ों रुपये की लागत से निर्माण कराया गया, जिसकी विस्तृत जांच की मांग की गई है। सड़क निर्माण कार्यों में भी अनियमितता और भूमि माफियाओं को लाभ पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि एक ही सड़क को कई छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर निर्माण कराया गया, जिससे न केवल वित्तीय नियमों का उल्लंघन हुआ, बल्कि पारदर्शिता भी प्रभावित हुई। साथ ही कुछ निर्जन क्षेत्रों में भी सड़क निर्माण कराए जाने की बात सामने आई है, जिससे निजी लाभ की आशंका जताई गई है।निविदा प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। वर्ष 2024-25 में लगभग 6 करोड़ रुपये की लागत से नाला निर्माण कार्य के लिए जारी निविदा प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है और पिछले तीन वर्षों में इसे तीन बार रद्द किया जा चुका है। इससे प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं।

इसके अलावा नालों की सफाई के लिए अलग से निविदा निकालने के प्रस्ताव पर भी सवाल उठाए गए हैं, जबकि पूर्व में यह कार्य सफाई एजेंसी द्वारा ही कराया जाता रहा है। इसे सरकारी धन के दुरुपयोग और संभावित बंदरबांट की आशंका से जोड़ा जा रहा है।अंत में सामाजिक कार्यकर्ता ने मांग की है कि इन सभी मामलों की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की जाए, ताकि आम जनता का विश्वास बहाल हो सके और सरकारी योजनाओं का लाभ सही रूप में लोगों तक पहुंच सके।


By Hasrat

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