राहुल कुमार, सारस न्यूज़, किशनगंज।
किशनगंज:- जिले के खनन विभाग में कथित रिश्वतखोरी का मामला उजागर हुआ है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार की मुख्यालय टीम ने ट्रैक्टर के रिलीज ऑर्डर के बदले 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए जिला खनन कार्यालय के दो कर्मियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार अभियुक्तों में लिपिक अशोक कुमार चौधरी तथा कार्यालय परिचारी सरोज कुमार सिंह शामिल हैं। दोनों पर आरोप है कि खनन विभाग द्वारा जब्त किए गए एक ट्रैक्टर का रिलीज ऑर्डर जारी करने के एवज में रिश्वत की मांग की जा रही थी।
चकला निवासी हबीब आलम ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके ट्रैक्टर को छोड़ने के लिए 15 हजार रुपये की मांग की जा रही है। शिकायत के सत्यापन के दौरान आरोप सही पाए जाने पर निगरानी थाना कांड संख्या 020/26 दिनांक 16 फरवरी 2026 दर्ज किया गया।
इसके बाद पुलिस उपाधीक्षक आसिफ इकबाल मेहदी के नेतृत्व में विशेष धावादल का गठन किया गया।
अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तारी
17 फरवरी को की गई ट्रैप कार्रवाई के दौरान लिपिक अशोक कुमार चौधरी को जिला खनन कार्यालय के समीप 8,000 रुपये लेते गिरफ्तार किया गया, जबकि परिचारी सरोज कुमार सिंह को 7,000 रुपये लेते हुए डुमरिया मोड़ स्थित एक चाय दुकान से दबोचा गया।
निगरानी टीम के अनुसार, रिश्वत की राशि अलग-अलग स्थानों पर लेने की योजना बनाई गई थी, ताकि किसी को संदेह न हो।
दोनों अभियुक्तों से पूछताछ जारी है। पूछताछ के बाद उन्हें विशेष निगरानी न्यायालय, भागलपुर में प्रस्तुत किया जाएगा। मामले की आगे की जांच की जा रही है।
इस पूरे मामले के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं—
- क्या खनन कार्यालय में यह वसूली का खेल लंबे समय से चल रहा था?
- क्या विभागीय पदाधिकारियों को इसकी भनक नहीं थी?
- क्या केवल दो कर्मियों की गिरफ्तारी से पूरा तंत्र साफ हो जाएगा?
- ट्रैक्टर रिलीज जैसे नियमित प्रशासनिक कार्य के लिए आम नागरिक को रिश्वत क्यों देनी पड़ रही थी?
- क्या जिला प्रशासन इस मामले में विभागीय जांच और निलंबन की कार्रवाई करेगा?
- क्या भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए कोई पारदर्शी ऑनलाइन व्यवस्था लागू की जाएगी?
