04 से 11 फरवरी तक किशनगंज में जागरूकता, जांच और सहभागिता का संगठित प्रयास
“हर व्यक्ति अलग, जिम्मेदारी हम सबकी”
आज का समाज तेजी से बदल रहा है—खानपान की आदतें बदली हैं, शारीरिक श्रम घटा है और जीवन में तनाव बढ़ा है। इसी बदलते जीवन-यापन के बीच स्वास्थ्य जांच को टालने की प्रवृत्ति गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। कैंसर जैसे रोग अक्सर शरीर में चुपचाप पनपते हैं, लेकिन लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देना बीमारी को जानलेवा बना देता है। चिकित्सकीय विशेषज्ञ मानते हैं कि कैंसर से सबसे बड़ी लड़ाई इलाज नहीं, बल्कि समय पर जांच और जागरूकता है।इसी पृष्ठभूमि में किशनगंज जिले में विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर 04 से 11 फरवरी तक विशेष कैंसर जागरूकता एवं जांच अभियान की शुरुआत की गई है, ताकि भय के बजाय समझ और जिम्मेदारी को समाज की सोच का हिस्सा बनाया जा सके।
स्वास्थ्य व्यवस्था को तैयार करने की पहल: सदर अस्पताल में कार्यशाला
सदर अस्पताल, किशनगंज में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें प्रभारी गैर-संचारी रोग पदाधिकारी सह जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी की उपस्थिति रही।कार्यशाला में स्वास्थ्य कर्मियों को कैंसर की प्रारंभिक पहचान, स्क्रीनिंग प्रक्रिया, रेफरल तंत्र और प्रभावी प्रबंधन के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई, ताकि प्राथमिक स्तर से ही संदिग्ध मरीजों को समय पर सही इलाज से जोड़ा जा सके।
सड़कों पर उतरा संदेश: सदर अस्पताल से गांधी चौक तक जागरूकता रैली
विश्व कैंसर जागरूकता दिवस पर सदर अस्पताल परिसर से गांधी चौक–बाजार तक कैंसर जागरूकता एवं रोकथाम रैली निकाली गई।रैली में सीडीओ, डीआईओ, प्रभारी एनसीडीओ, प्रभारी वीबीडीओ सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, कर्मी और सहयोगी संस्थानों ने भाग लिया। पोस्टर, नारों और जनसंवाद के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया गया कि कैंसर से डरने की नहीं, समय पर जांच कराने की जरूरत है।
गांव-गांव तक पहुंची जांच: हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर बने अभियान की रीढ़
अभियान के तहत जिले के सदर अस्पताल, अनुमंडल अस्पताल, रेफरल अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी और सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर विशेष जागरूकता गतिविधियां और निःशुल्क कैंसर स्क्रीनिंग की जा रही है।आज विभिन्न स्वास्थ्य केंद्र में मौखिक कैंसर, स्तन कैंसर और गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से संबंधित जांच की गई तथा लोगों को यह समझाया गया कि शुरुआती स्तर पर जांच कैसे जीवन बचा सकती है।
“जांच में देरी सबसे बड़ा खतरा”
जिला गैर-संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार ने कहा कि कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण जांच में देरी है। लोग शुरुआती लक्षणों को हल्के में ले लेते हैं, जबकि प्रारंभिक अवस्था में पहचान होने पर इलाज संभव है। तंबाकू, धूम्रपान, असंतुलित खानपान और शारीरिक निष्क्रियता इसके प्रमुख कारण हैं। यह अभियान लोगों को जांच के प्रति गंभीर बनाने का प्रयास है।
“डर से नहीं, जागरूकता से जीती जाती है लड़ाई” – सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि कैंसर कोई अभिशाप नहीं है। सही समय पर जांच, सही मार्गदर्शन और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इसे हराया जा सकता है। जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर चल रहा यह अभियान इसी सोच को जन-जन तक पहुंचाने के लिए है।
अभियान की आत्मा: सोच बदलने की एक संगठित कोशिश
सदर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ अनवर हुसैन ने बताया कि यह अभियान महज आंकड़ों या औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मूल उद्देश्य समाज की उस मानसिकता को बदलना है जिसमें कैंसर को आज भी लाइलाज मान लिया जाता है। स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि लोग डर के कारण जांच से न भागें, बल्कि सही समय पर स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचें। निःशुल्क जांच, सही परामर्श और समय पर रेफरल के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी व्यक्ति केवल जानकारी या संसाधन के अभाव में इलाज से वंचित न रहे।विश्व कैंसर दिवस की थीम के अनुरूप यह अभियान यह संदेश देता है कि हर व्यक्ति की कहानी अलग हो सकती है, लेकिन कैंसर के खिलाफ जागरूकता की लड़ाई हम सबकी साझा जिम्मेदारी है।
राहुल कुमार, सारस न्यूज़, किशनगंज।
04 से 11 फरवरी तक किशनगंज में जागरूकता, जांच और सहभागिता का संगठित प्रयास
“हर व्यक्ति अलग, जिम्मेदारी हम सबकी”
आज का समाज तेजी से बदल रहा है—खानपान की आदतें बदली हैं, शारीरिक श्रम घटा है और जीवन में तनाव बढ़ा है। इसी बदलते जीवन-यापन के बीच स्वास्थ्य जांच को टालने की प्रवृत्ति गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। कैंसर जैसे रोग अक्सर शरीर में चुपचाप पनपते हैं, लेकिन लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देना बीमारी को जानलेवा बना देता है। चिकित्सकीय विशेषज्ञ मानते हैं कि कैंसर से सबसे बड़ी लड़ाई इलाज नहीं, बल्कि समय पर जांच और जागरूकता है।इसी पृष्ठभूमि में किशनगंज जिले में विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर 04 से 11 फरवरी तक विशेष कैंसर जागरूकता एवं जांच अभियान की शुरुआत की गई है, ताकि भय के बजाय समझ और जिम्मेदारी को समाज की सोच का हिस्सा बनाया जा सके।
स्वास्थ्य व्यवस्था को तैयार करने की पहल: सदर अस्पताल में कार्यशाला
सदर अस्पताल, किशनगंज में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें प्रभारी गैर-संचारी रोग पदाधिकारी सह जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी की उपस्थिति रही।कार्यशाला में स्वास्थ्य कर्मियों को कैंसर की प्रारंभिक पहचान, स्क्रीनिंग प्रक्रिया, रेफरल तंत्र और प्रभावी प्रबंधन के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई, ताकि प्राथमिक स्तर से ही संदिग्ध मरीजों को समय पर सही इलाज से जोड़ा जा सके।
सड़कों पर उतरा संदेश: सदर अस्पताल से गांधी चौक तक जागरूकता रैली
विश्व कैंसर जागरूकता दिवस पर सदर अस्पताल परिसर से गांधी चौक–बाजार तक कैंसर जागरूकता एवं रोकथाम रैली निकाली गई।रैली में सीडीओ, डीआईओ, प्रभारी एनसीडीओ, प्रभारी वीबीडीओ सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, कर्मी और सहयोगी संस्थानों ने भाग लिया। पोस्टर, नारों और जनसंवाद के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया गया कि कैंसर से डरने की नहीं, समय पर जांच कराने की जरूरत है।
गांव-गांव तक पहुंची जांच: हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर बने अभियान की रीढ़
अभियान के तहत जिले के सदर अस्पताल, अनुमंडल अस्पताल, रेफरल अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी और सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर विशेष जागरूकता गतिविधियां और निःशुल्क कैंसर स्क्रीनिंग की जा रही है।आज विभिन्न स्वास्थ्य केंद्र में मौखिक कैंसर, स्तन कैंसर और गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से संबंधित जांच की गई तथा लोगों को यह समझाया गया कि शुरुआती स्तर पर जांच कैसे जीवन बचा सकती है।
“जांच में देरी सबसे बड़ा खतरा”
जिला गैर-संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार ने कहा कि कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण जांच में देरी है। लोग शुरुआती लक्षणों को हल्के में ले लेते हैं, जबकि प्रारंभिक अवस्था में पहचान होने पर इलाज संभव है। तंबाकू, धूम्रपान, असंतुलित खानपान और शारीरिक निष्क्रियता इसके प्रमुख कारण हैं। यह अभियान लोगों को जांच के प्रति गंभीर बनाने का प्रयास है।
“डर से नहीं, जागरूकता से जीती जाती है लड़ाई” – सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि कैंसर कोई अभिशाप नहीं है। सही समय पर जांच, सही मार्गदर्शन और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इसे हराया जा सकता है। जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर चल रहा यह अभियान इसी सोच को जन-जन तक पहुंचाने के लिए है।
अभियान की आत्मा: सोच बदलने की एक संगठित कोशिश
सदर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ अनवर हुसैन ने बताया कि यह अभियान महज आंकड़ों या औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मूल उद्देश्य समाज की उस मानसिकता को बदलना है जिसमें कैंसर को आज भी लाइलाज मान लिया जाता है। स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि लोग डर के कारण जांच से न भागें, बल्कि सही समय पर स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचें। निःशुल्क जांच, सही परामर्श और समय पर रेफरल के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी व्यक्ति केवल जानकारी या संसाधन के अभाव में इलाज से वंचित न रहे।विश्व कैंसर दिवस की थीम के अनुरूप यह अभियान यह संदेश देता है कि हर व्यक्ति की कहानी अलग हो सकती है, लेकिन कैंसर के खिलाफ जागरूकता की लड़ाई हम सबकी साझा जिम्मेदारी है।