संक्रामक रोगों की समयपूर्व पहचान और त्वरित प्रतिक्रिया अब शीर्ष प्राथमिकता—सिविल सर्जन
राहुल, किशनगंज
संक्रामक रोगों के बदलते स्वरूप और समय-समय पर सामने आने वाले खसरा-रूबेला, डिप्थीरिया तथा पर्टूसिस जैसे मामलों ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि जिला-स्तर पर सुदृढ़, सक्रिय और प्रतिक्रियाशील रोग निगरानी प्रणाली आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि किसी भी संभावित बीमारी की जानकारी सबसे पहले और सबसे तेज़ जिला प्रणाली तक पहुँचे। इसी उद्देश्य से आज किशनगंज में जिला सर्विलेंस कार्यशाला आयोजित की गई, जिसका उद्घाटन सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने किया।कार्यक्रम में जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार, डीपीएम डॉ मुनाजिम,डब्लूएचओ के एसएमओ डॉ. प्रीतम घोष, यूनिसेफ के एसएमसी इजाज अफ़ज़ल, सभी एमओआईसी, जिला स्वास्थ्य समिति के अधिकारी, सर्विलेंस इकाई सभी विभागीय अधिकारी शामिल हुए।
संक्रामक रोगों की पहचान और रिपोर्टिंग पर व्यापक प्रशिक्षण
कार्यशाला में स्वास्थ्यकर्मियों को खसरा, रूबेला, डिप्थीरिया, काली खांसी और अन्य संक्रामक रोगों के लक्षण, केस-परिभाषा, सैंपलिंग, लाइन-लिस्टिंग और रिपोर्टिंग प्रोटोकॉल पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया। नव नियुक्त चिकित्सक , सीएचओ और एएनएम को विशेष निर्देश दिया गया कि किसी भी संदिग्ध रोगी की सूचना तत्काल सर्विलेंस इकाई तक पहुँचायी जाए, ताकि प्रतिक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो।सिविल सर्जन डॉ. चौधरी ने कहा किशनगंज को अपने सर्विलेंस सिस्टम को इतना सक्षम बनाना है कि हम किसी भी संक्रामक बीमारी को प्रारंभिक चरण में ही पहचानकर उसे फैलने से रोक सकें। इसके लिए हर स्तर से समय पर और सटीक सूचना अत्यंत महत्वपूर्ण है।”
आशा नेटवर्क के माध्यम से सूचना प्रवाह को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर
कार्यक्रम में यह रेखांकित किया गया कि सामुदायिक स्तर पर बीमारी के शुरुआती संकेत सबसे पहले आशा तक पहुँचते हैं। इसलिए आशाओं से मिलने वाली सूचना सर्विलेंस की नींव है।सभी ब्लॉकों की टीमों को निर्देश दिया गया कि आशा नेटवर्क को सक्रिय और नियमित रिपोर्टिंग हेतु प्रेरित किया जाए।
निजी संस्थानों को सर्विलेंस नेटवर्क से जोड़ना—महत्वपूर्ण रणनीति
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवेंद्र कुमार ने बताया कि कई मामलों की शुरुआती रिपोर्टिंग निजी अस्पतालों में होती है, इसलिए निजी स्वास्थ्य संस्थानों की सहभागिता रोग नियंत्रण का अनिवार्य हिस्सा है।कार्यक्रम में उन्हें केस रिपोर्टिंग, सैंपल डिस्पैच और प्रतिक्रिया-समन्वय की प्रक्रिया से अवगत कराया गया।डब्लूएचओ के एसएमओ डॉ. प्रीतम घोष ने कहा रोग निगरानी तभी मजबूत हो सकती है जब सरकारी-निजी स्वास्थ्य सेवाएँ एक साझा प्लेटफॉर्म पर रिपोर्टिंग को गंभीरता से अपनाएँ। हर केस की समय पर रिपोर्टिंग बेहद आवश्यक है।यूनिसेफ के एसएमसी इजाज अफ़ज़ल ने कहा कि समुदाय, आशा नेटवर्क और स्वास्थ्य संस्थानों के बीच सूचना का प्रवाह जितना सुचारू होगा, बच्चे और समुदाय उतने ही सुरक्षित रहेंगे। सर्विलेंस की मजबूती सीधे-सीधे सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ी है।”
नियमित टीकाकरण में उल्लेखनीय उपलब्धि हुई है
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि जिले में नियमित टीकाकरण का कवरेज 100 प्रतिशत से दर्ज किया गया है, जो सभी ब्लॉकों के संयुक्त प्रयास का प्रमाण है।उन्होंने यह भी कहा कि टीकाकरण में मिली उपलब्धि यह दर्शाती है कि जिला टीम संगठित है। अब सर्विलेंस में भी यही ऊर्जा और एकजुटता प्रदर्शित करने की आवश्यकता है।कार्यक्रम के अंत में सभी अधिकारियों ने किशनगंज जिले को एक सुदृढ़, सतर्क और त्वरित-प्रतिक्रिया आधारित सर्विलेंस मॉडल के रूप में विकसित करने का संकल्प दोहराया। सिविल सर्जन ने सभी चिकित्सा पदाधिकारियों, आशा-नेटवर्क, निजी संस्थानों और सहयोगी एजेंसियों से समन्वयपूर्ण प्रयास जारी रखने की अपील की।
संक्रामक रोगों की समयपूर्व पहचान और त्वरित प्रतिक्रिया अब शीर्ष प्राथमिकता—सिविल सर्जन
राहुल, किशनगंज
संक्रामक रोगों के बदलते स्वरूप और समय-समय पर सामने आने वाले खसरा-रूबेला, डिप्थीरिया तथा पर्टूसिस जैसे मामलों ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि जिला-स्तर पर सुदृढ़, सक्रिय और प्रतिक्रियाशील रोग निगरानी प्रणाली आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि किसी भी संभावित बीमारी की जानकारी सबसे पहले और सबसे तेज़ जिला प्रणाली तक पहुँचे। इसी उद्देश्य से आज किशनगंज में जिला सर्विलेंस कार्यशाला आयोजित की गई, जिसका उद्घाटन सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने किया।कार्यक्रम में जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार, डीपीएम डॉ मुनाजिम,डब्लूएचओ के एसएमओ डॉ. प्रीतम घोष, यूनिसेफ के एसएमसी इजाज अफ़ज़ल, सभी एमओआईसी, जिला स्वास्थ्य समिति के अधिकारी, सर्विलेंस इकाई सभी विभागीय अधिकारी शामिल हुए।
संक्रामक रोगों की पहचान और रिपोर्टिंग पर व्यापक प्रशिक्षण
कार्यशाला में स्वास्थ्यकर्मियों को खसरा, रूबेला, डिप्थीरिया, काली खांसी और अन्य संक्रामक रोगों के लक्षण, केस-परिभाषा, सैंपलिंग, लाइन-लिस्टिंग और रिपोर्टिंग प्रोटोकॉल पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया। नव नियुक्त चिकित्सक , सीएचओ और एएनएम को विशेष निर्देश दिया गया कि किसी भी संदिग्ध रोगी की सूचना तत्काल सर्विलेंस इकाई तक पहुँचायी जाए, ताकि प्रतिक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो।सिविल सर्जन डॉ. चौधरी ने कहा किशनगंज को अपने सर्विलेंस सिस्टम को इतना सक्षम बनाना है कि हम किसी भी संक्रामक बीमारी को प्रारंभिक चरण में ही पहचानकर उसे फैलने से रोक सकें। इसके लिए हर स्तर से समय पर और सटीक सूचना अत्यंत महत्वपूर्ण है।”
आशा नेटवर्क के माध्यम से सूचना प्रवाह को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर
कार्यक्रम में यह रेखांकित किया गया कि सामुदायिक स्तर पर बीमारी के शुरुआती संकेत सबसे पहले आशा तक पहुँचते हैं। इसलिए आशाओं से मिलने वाली सूचना सर्विलेंस की नींव है।सभी ब्लॉकों की टीमों को निर्देश दिया गया कि आशा नेटवर्क को सक्रिय और नियमित रिपोर्टिंग हेतु प्रेरित किया जाए।
निजी संस्थानों को सर्विलेंस नेटवर्क से जोड़ना—महत्वपूर्ण रणनीति
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवेंद्र कुमार ने बताया कि कई मामलों की शुरुआती रिपोर्टिंग निजी अस्पतालों में होती है, इसलिए निजी स्वास्थ्य संस्थानों की सहभागिता रोग नियंत्रण का अनिवार्य हिस्सा है।कार्यक्रम में उन्हें केस रिपोर्टिंग, सैंपल डिस्पैच और प्रतिक्रिया-समन्वय की प्रक्रिया से अवगत कराया गया।डब्लूएचओ के एसएमओ डॉ. प्रीतम घोष ने कहा रोग निगरानी तभी मजबूत हो सकती है जब सरकारी-निजी स्वास्थ्य सेवाएँ एक साझा प्लेटफॉर्म पर रिपोर्टिंग को गंभीरता से अपनाएँ। हर केस की समय पर रिपोर्टिंग बेहद आवश्यक है।यूनिसेफ के एसएमसी इजाज अफ़ज़ल ने कहा कि समुदाय, आशा नेटवर्क और स्वास्थ्य संस्थानों के बीच सूचना का प्रवाह जितना सुचारू होगा, बच्चे और समुदाय उतने ही सुरक्षित रहेंगे। सर्विलेंस की मजबूती सीधे-सीधे सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ी है।”
नियमित टीकाकरण में उल्लेखनीय उपलब्धि हुई है
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि जिले में नियमित टीकाकरण का कवरेज 100 प्रतिशत से दर्ज किया गया है, जो सभी ब्लॉकों के संयुक्त प्रयास का प्रमाण है।उन्होंने यह भी कहा कि टीकाकरण में मिली उपलब्धि यह दर्शाती है कि जिला टीम संगठित है। अब सर्विलेंस में भी यही ऊर्जा और एकजुटता प्रदर्शित करने की आवश्यकता है।कार्यक्रम के अंत में सभी अधिकारियों ने किशनगंज जिले को एक सुदृढ़, सतर्क और त्वरित-प्रतिक्रिया आधारित सर्विलेंस मॉडल के रूप में विकसित करने का संकल्प दोहराया। सिविल सर्जन ने सभी चिकित्सा पदाधिकारियों, आशा-नेटवर्क, निजी संस्थानों और सहयोगी एजेंसियों से समन्वयपूर्ण प्रयास जारी रखने की अपील की।