सारस न्यूज, किशनगंज।
जन्मजात हृदय रोग (सीएचडी) जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे बच्चों और उनके परिजनों के लिए मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है। महंगे इलाज की वजह से जहां गरीब परिवार अक्सर असहाय महसूस करते हैं, वहीं अब यह योजना ऐसे बच्चों को समय पर पहचान, रेफरल और निःशुल्क उपचार की सुविधा देकर नया जीवन देने का काम कर रही है।
इसी कड़ी में किशनगंज जिले के 10 बच्चों को पटना स्थित इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी में आयोजित 11वें विशेष शिविर के लिए रवाना किया गया। यहां अहमदाबाद के श्री सत्य साईं हार्ट हॉस्पिटल के विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम बच्चों की जांच कर आगे के उपचार की प्रक्रिया तय करेगी।
सुरक्षित व्यवस्था के साथ बच्चों को भेजा गया पटना
स्वास्थ्य विभाग की देखरेख में सदर अस्पताल किशनगंज से 8 बच्चों को तीन एम्बुलेंस के जरिए सुरक्षित रूप से पटना भेजा गया, जबकि 2 बच्चे अपने परिजनों के साथ ट्रेन से रवाना हुए। पूरी प्रक्रिया की निगरानी स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई, ताकि बच्चों को बिना किसी परेशानी के समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सके।
जिले के विभिन्न प्रखंडों से चयनित हुए बच्चे
इस विशेष शिविर के लिए जिले के अलग-अलग प्रखंडों से बच्चों का चयन किया गया है। इनमें:
ठाकुरगंज से
- तबस्सुम खातून
- अल्फाज हुसैन
- राजेंद्र कुमार राजभर
- सलमान रजा
पोठिया से
- सोहन हरिजन
- आरती कुमारी
- सुहेब
किशनगंज से
- शिवांश कुमार
- आंचल कुमारी
कोचाधामन से
- रागिनी कुमारी
इन सभी बच्चों की पहचान राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की टीम द्वारा गांव-स्तर पर चलाए गए गहन स्वास्थ्य स्क्रीनिंग अभियान के दौरान की गई।
“कोई बच्चा आर्थिक अभाव में इलाज से वंचित न रहे”
जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. मुनाजिम ने बताया कि यह योजना सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समय पर पहचान, उचित परामर्श और संस्थागत देखभाल का एक समन्वित मॉडल है।
उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश है कि आर्थिक कमजोरी किसी भी बच्चे के इलाज में बाधा न बने और हर जरूरतमंद को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो।
पहले भी कई बच्चों को मिल चुका है नया जीवन
जिले में इससे पहले भी मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के तहत कई विशेष शिविरों में बच्चों को भेजा जा चुका है, जहां उनका सफल इलाज हुआ है। लगातार मिल रही सफलता ने इस योजना को अब जिले में एक भरोसेमंद स्वास्थ्य सुरक्षा कवच के रूप में स्थापित कर दिया है।
इससे गरीब परिवारों के बीच यह भरोसा मजबूत हुआ है कि अब उनके बच्चों के गंभीर इलाज के लिए भी सरकार उनके साथ खड़ी है।
बाल स्वास्थ्य सेवाओं को मिल रही मजबूती
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना राज्य सरकार की संवेदनशील और दूरदर्शी स्वास्थ्य नीति का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि आरबीएसके के माध्यम से हो रही सक्रिय स्क्रीनिंग और समयबद्ध रेफरल व्यवस्था ने जिले में बाल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया है।
उन्होंने कहा कि विभाग का लक्ष्य है कि हर जरूरतमंद बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण और निःशुल्क इलाज समय पर पहुंचे, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित रह सके।
समान स्वास्थ्य अधिकार की दिशा में मजबूत कदम
जिलाधिकारी विशाल राज ने कहा कि मुख्यमंत्री सात निश्चय के अंतर्गत संचालित यह योजना समावेशी विकास और सामाजिक न्याय की भावना को साकार करती है। उन्होंने कहा कि जन्मजात हृदय रोग जैसे मामलों में इलाज बेहद महंगा होता है, ऐसे में सरकार द्वारा निःशुल्क सुविधा उपलब्ध कराना गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि इस योजना का लाभ हर पात्र बच्चे तक पहुंचे और कोई भी परिवार आर्थिक तंगी के कारण इलाज से वंचित न रह जाए।
डीएम ने कहा कि मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना आज उन परिवारों के लिए संजीवनी साबित हो रही है, जो कभी अपने बच्चों के इलाज को लेकर बेबस थे। यह योजना न केवल बच्चों को नया जीवन दे रही है, बल्कि समाज में यह भरोसा भी मजबूत कर रही है कि सरकार हर जरूरतमंद के साथ खड़ी है।
संक्षेप में
- 10 बच्चों को विशेष हृदय जांच शिविर के लिए पटना भेजा गया
- आरबीएसके टीम ने गांव-स्तर पर की पहचान
- निःशुल्क जांच और इलाज की सुविधा
- गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत बनी योजना
- स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने कहा — हर पात्र बच्चे तक पहुंचेगा लाभ
