सारस न्यूज़, सिलीगुड़ी।
दार्जिलिंग जिला पुलिस के अधीन फांसीदेवा में एक मां ने अपने सात महीने के नवजात शिशु को खो दिया। लेकिन यह कोई प्राकृतिक घटना नहीं बताई जा रही है। आरोप है कि यह दर्दनाक घटना भू-माफियाओं द्वारा की गई मारपीट का नतीजा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, फांसीदेवा थाना क्षेत्र के झमकलाल जोत निवासी सुरु मुंडा के पास घर सहित करीब दो बीघा जमीन है। इस जमीन पर भू-माफियाओं की नजर थी। बीते 23 दिसंबर को घर में केवल महिलाएं मौजूद थीं। इसी दौरान भू-माफिया मोहम्मद कादिर समेत कुछ लोग वहां पहुंचे और जमीन खाली करने का दबाव बनाने लगे। बात नहीं मानने पर उन्होंने मारपीट शुरू कर दी।
इस घटना में सुरु मुंडा की बहू रोशनी उरांव, जो उस समय सात महीने की गर्भवती थीं, को गंभीर चोटें आईं। इसके बाद भू-माफियाओं ने खेत में लगी सब्जियों को भी बर्बाद कर दिया। घटना के बाद सुरु मुंडा ने मोहम्मद कादिर के खिलाफ फांसीदेवा थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि मोहम्मद कादिर ने अपने साथियों के साथ मिलकर गर्भवती महिला सहित अन्य लोगों के साथ मारपीट की है।
हालांकि आरोप है कि पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। बताया जा रहा है कि आरोपी मोहम्मद कादिर का संबंध तृणमूल कांग्रेस से है।
मारपीट की घटना के बाद 7 जनवरी को रोशनी उरांव को फांसीदेवा ग्रामीण अस्पताल में भर्ती कराया गया। 8 जनवरी को उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया। समय से पहले जन्म होने के कारण नवजात को अस्पताल में ही रखा गया था। लेकिन बीते रविवार को उस मासूम की मौत हो गई।
अब सवाल यह है कि इस नवजात की मौत का जिम्मेदार कौन है?
इस संबंध में सुरु मुंडा के बेटे गुरवा मुंडा ने बताया कि रोशनी उरांव उसके छोटे भाई की पत्नी है। उसने आरोप लगाया कि 23 दिसंबर को जमीन कब्जाने आए मोहम्मद कादिर और अन्य लोगों ने बेरहमी से मारपीट की थी। इस दौरान उसकी भाभी के पेट और हाथ में गंभीर चोटें आई थीं, जिसके कारण सात महीने के नवजात शिशु को उसने खो दिया।
गुरवा मुंडा का कहना है कि फांसीदेवा थाना पुलिस उनकी कोई बात नहीं सुन रही है।
