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जिला प्रशासन की पहल पर प्रथम सुरजापुरी महोत्सव का भव्य शुभारंभ।

सारस न्यूज़, किशनगंज।

जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में प्रथम सुरजापुरी महोत्सव का विधिवत शुभारंभ सम्राट अशोक भवन के समीप स्थित मोटर जांच केंद्र परिसर में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन जिला पदाधिकारी विशाल राज एवं पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए जिला पदाधिकारी ने कहा कि सुरजापुरी भाषा और संस्कृति को समर्पित इस महोत्सव का आयोजन जिले के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने बताया कि सुरजापुरी भाषा इस क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, जो सामाजिक विविधता के बीच एकता का संदेश देती है। यह केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि लोकजीवन, परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों का जीवंत स्वरूप है। उन्होंने नई पीढ़ी से आह्वान किया कि वे अपनी मातृभाषा और संस्कृति को संजोने में सक्रिय भूमिका निभाएं। साथ ही उन्होंने कहा कि इस पहल को आने वाले वर्षों में और अधिक व्यापक स्वरूप दिया जाएगा, ताकि सुरजापुरी संस्कृति को राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सके।

पुलिस अधीक्षक ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों का संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। सुरजापुरी महोत्सव इसी दिशा में एक सराहनीय प्रयास है, जो लोक परंपराओं को सहेजने और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य करेगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह महोत्सव आने वाले समय में बड़े सांस्कृतिक आयोजन के रूप में स्थापित होगा।

कार्यक्रम के दौरान सुरजापुरी साहित्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया। इनमें ‘सुरजापुर की माटी’ (उपन्यास) – लेखक श्री जगदीश य० राम उर्फ मिराक सुरजाभी, ‘सबसे बोड़ो टाका’ (लघुकथा) – डॉ० पी० पी० सिन्हा, ‘हाल जोतवाजाही’ (गीत/काव्य संग्रह) – राजकुमार शाह तथा ‘पोरेर बेटी’ – लेखिका मिली कुमारी शामिल हैं। इन पुस्तकों को कार्यक्रम में उपस्थित पदाधिकारियों को स्मृति-चिह्न के रूप में भेंट किया गया।

महोत्सव परिसर में सुरजापुरी भाषा पर आधारित AI स्टॉल, सांस्कृतिक प्रदर्शनी स्टॉल, पुस्तक स्टॉल तथा जीविका समूहों द्वारा लगाए गए पारंपरिक खान-पान के स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहे। जिला पदाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक ने विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया और पारंपरिक व्यंजनों, विशेषकर ‘भक्के’ का स्वाद भी लिया। इसके अतिरिक्त सुरजापुरी विवाह परंपरा से जुड़े डोल-नगाड़ा की प्रदर्शनी ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में साहित्यकार, कलाकार, छात्र-छात्राएं, बुद्धिजीवी एवं आम नागरिक उपस्थित रहे। उत्साह और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर यह महोत्सव जिले के सांस्कृतिक इतिहास में एक नई शुरुआत के रूप में दर्ज हुआ।

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