राहुल कुमार, सारस न्यूज़, किशनगंज।
जिला पुलिस ने अर्राबाड़ी थाना क्षेत्र के बालूबाड़ी गांव में हुए सनसनीखेज महिला हत्याकांड का महज 5 दिनों के भीतर सफल उद्भेदन कर दिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस कांड का मुख्य साजिशकर्ता और हत्यारा कोई और नहीं, बल्कि मृतका का अपना भैसुर (रिश्तेदार) निकला, जिसने पुलिस को गुमराह करने के लिए खुद ही इस मामले में वादी बनकर प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
बीते 15 अप्रैल 2026 की रात अर्राबाड़ी थाना अंतर्गत बालूबाड़ी गांव में एक मकई के खेत से सनवरी बेगम का शव बरामद हुआ था। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए SIT (विशेष अनुसंधान दल) का गठन किया। जांच के दौरान पुलिस ने जब तकनीकी साक्ष्यों और मानवीय सूचनाओं को खंगाला, तो कड़ियां वादी फजले रब्बी से जुड़ने लगीं।
पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि फजले रब्बी और मृतका के बीच पुरानी रंजिश थी। फजले रब्बी चाहता था कि सनवरी बेगम अपना गांव का घर बेचकर मुंबई में रह रहे अपने पति के पास चली जाए, ताकि वह उस जमीन पर बड़ा मकान बना सके।
हत्या के दिन फजले रब्बी ने अपने मित्र मैनुल हक के साथ मिलकर योजना बनाई। उन्होंने सनवरी बेगम को “मुफ्त जलावन” देने का लालच देकर मकई के खेत में बुलाया। जब वह अपनी गोतनी और 2 साल की बच्ची के साथ वहां पहुंची, तो आरोपियों ने दबाव बनाकर बच्ची को घर भेज दिया और महिला को अकेले दूसरे खेत में ले गए। वहां मौका पाकर दोनों ने गला दबाकर उसकी हत्या कर दी।
शातिर अपराधी फजले रब्बी ने पुलिस का ध्यान भटकाने के लिए खुद ही थाने में केस दर्ज कराया। उसने मृतका के पति को सूचना दिए बिना और उसकी सहमति के बिना ही वादी बनकर प्राथमिकी लिखवाई। वह बार-बार अपना बयान बदलकर पुलिस को उलझाने की कोशिश कर रहा था।
विशेष अनुसंधान दल ने 25 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की और करीब 15 ठिकानों पर छापेमारी की। गहन पूछताछ के बाद फजले रब्बी और मैनुल हक ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
