राहुल कुमार, सारस न्यूज़, किशनगंज।
हौसला हो तो आपदा को भी अवसर में बदला जा सकता है। इसे सच कर दिखाया है किशनगंज शहर के खगड़ा (प्रेम पुल) निवासी जूही दास ने। जूही ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में 649वीं रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। यह सफलता केवल एक चयन नहीं, बल्कि अटूट धैर्य और समर्पण की कहानी है।
दुखों का पहाड़ भी नहीं डिगा सका हौसला
जूही की यह सफलता संघर्षों की पराकाष्ठा है। जानकारी के अनुसार, साक्षात्कार (इंटरव्यू) से ठीक पहले 13 फरवरी को जूही के पिता स्व. निवारण दास का बीमारी के कारण निधन हो गया था। समाज की रूढ़ियों को पीछे छोड़ जूही ने ही अपने पिता को मुखाग्नि दी। पिता के जाने के गम और आंसुओं के बीच मात्र 11 दिन बाद, 24 फरवरी को उन्होंने यूपीएससी का इंटरव्यू दिया और अंतिम रूप से चयनित होकर अपने दिवंगत पिता के सपने को साकार किया।
शिक्षा और शैक्षणिक सफर
जूही की प्रारंभिक शिक्षा किशनगंज में ही हुई। उनकी शैक्षणिक उपलब्धियां इस प्रकार हैं:
मैट्रिक (2015): बाल मंदिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल – 9.4 CGPA
इंटर (2017): चैतन्य, विशाखापट्टनम – 92%
उच्च शिक्षा: कोलकाता से बीटेक (B.Tech) की डिग्री
मां की अधूरी हसरत को बनाया अपना लक्ष्य
जूही को इस मुकाम तक पहुंचाने में उनकी मां अन्निका दास (न्यायमित्र) की बड़ी भूमिका रही। अन्निका दास स्वयं भी यूपीएससी की उम्मीदवार रह चुकी थीं, लेकिन सफल नहीं हो पाईं। अपनी मां के उसी अधूरे सपने को जूही ने अपनी प्रेरणा बनाया। बिना किसी कोचिंग संस्थान के, घर पर ही ऑनलाइन नोट्स के माध्यम से स्वाध्याय (Self Study) कर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया। उन्हें इस सफर में सपन कुमार दास और सुशोभन दास से मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
मिल सकता है IPS या IRS कैडर
यह जूही का चौथा प्रयास था। इससे पहले वह दो बार इंटरव्यू तक पहुंच चुकी थीं, लेकिन अंतिम सूची में नाम नहीं आ सका था। अपनी रैंक के आधार पर जूही को IPS (भारतीय पुलिस सेवा) या IRS (भारतीय राजस्व सेवा) मिलने की संभावना है। उनके पिता घर के पास ही मोटर पार्ट्स की दुकान चलाते थे और आज उनकी बेटी की इस सफलता से पूरा इलाका गौरवान्वित है।
