सारस न्यूज़, वेब डेस्क।
संसद में प्रीपेड मोबाइल उपभोक्ताओं से जुड़े नियमों को लेकर टेलीकॉम कंपनियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए। चर्चा के दौरान यह मुद्दा प्रमुखता से सामने आया कि रिचार्ज समाप्त होने के तुरंत बाद कई कंपनियां इनकमिंग कॉल की सुविधा भी बंद कर देती हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
सदन में कहा गया कि यदि रिचार्ज खत्म होने के बाद आउटगोइंग कॉल बंद होती है तो यह तकनीकी रूप से समझा जा सकता है, लेकिन इनकमिंग कॉल बंद कर देना उपभोक्ताओं के लिए बड़ी समस्या बन जाता है। ऐसी स्थिति में न तो कोई व्यक्ति उपभोक्ता से संपर्क कर पाता है और न ही बैंकिंग या अन्य जरूरी सेवाओं से जुड़े OTP और महत्वपूर्ण संदेश मोबाइल पर पहुंच पाते हैं। आपातकालीन परिस्थितियों में यह स्थिति और गंभीर हो सकती है।
इसके साथ ही 28 दिन की वैधता वाले रिचार्ज प्लान पर भी सवाल उठाए गए। तर्क दिया गया कि वर्ष में 12 महीने होते हैं, लेकिन 28 दिन के प्लान के कारण उपभोक्ताओं को साल में 13 बार रिचार्ज कराना पड़ता है, जिससे अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। मांग की गई कि रिचार्ज योजनाओं की वैधता कैलेंडर माह यानी 30 या 31 दिनों के आधार पर तय की जाए।
संसद में यह भी कहा गया कि आज मोबाइल फोन केवल सुविधा नहीं बल्कि आम नागरिक की दैनिक आवश्यकता बन चुका है। बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य, सरकारी सेवाओं और आपातकालीन संपर्क के लिए मोबाइल पर निर्भरता लगातार बढ़ी है, इसलिए दूरसंचार कंपनियों को उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत व्यवस्था अपनानी चाहिए।
इस मुद्दे के सामने आने के बाद उपभोक्ता हितों से जुड़े संगठनों ने भी दूरसंचार क्षेत्र में स्पष्ट नियमों की जरूरत बताई है, ताकि ग्राहकों को अनावश्यक अतिरिक्त खर्च और असुविधा से राहत मिल सके।
