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गुरुग्राम में टेनिस खिलाड़ी राधिका यादव की हत्या, पिता ने बेटी की सफलता से आहत होकर मारी गोली।

ByHasrat

Jul 11, 2025 #हत्या

सारस न्यूज़, वेब डेस्क।

हरियाणा की उभरती हुई टेनिस खिलाड़ी राधिका यादव (25) की उसके ही पिता दीपक यादव ने गोली मारकर हत्या कर दी। यह हृदयविदारक घटना गुरुग्राम के सेक्टर 57 स्थित उनके घर में सुबह लगभग 10:30 बजे हुई।

🔹 घटना की पृष्ठभूमि

राधिका यादव ने हरियाणा की टॉप टेनिस खिलाड़ियों में जगह बनाई थी और उनका ITF डबल्स रैंकिंग 113 था। उन्होंने अपनी खुद की टेनिस अकादमी शुरू की थी जहाँ वह बच्चों को प्रशिक्षण दे रही थीं।

पुलिस जांच में सामने आया है कि राधिका के पिता दीपक यादव को यह बात बुरी लगती थी कि गाँव के लोग ताना मारते थे कि वे बेटी की कमाई पर जीवन जी रहे हैं। उन्होंने राधिका से कई बार टेनिस अकादमी बंद करने को कहा, लेकिन राधिका ने मना कर दिया। इसी बात को लेकर पिता का ‘गर्व’ आहत हुआ और उन्होंने बेटी की जान ले ली।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में पहले कहा गया था कि राधिका के इंस्टाग्राम रील्स या सोशल मीडिया पर सक्रियता को लेकर मतभेद था, लेकिन गुरुग्राम पुलिस ने स्पष्ट किया है कि हत्या का मुख्य कारण अकादमी को लेकर पिता की नाराजगी और सामाजिक दबाव था।

🔹 कैसे हुई हत्या

दीपक यादव ने लाइसेंसी रिवॉल्वर (.32 बोर) से राधिका पर 5 गोलियां चलाईं, जिनमें से 3 गोलियां उसकी पीठ में लगीं। उस समय राधिका रसोई में खाना बना रही थी।

गोली लगने के बाद परिजन राधिका को एशिया मारिंगो अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। राधिका के चाचा की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई और दीपक यादव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

🔹 समाज में आक्रोश

राधिका की हत्या ने खेल जगत और आम लोगों को झकझोर दिया है। कई खेलप्रेमियों और महिला संगठनों ने इसे पितृसत्ता और झूठी इज्जत की मानसिकता का वीभत्स उदाहरण बताया है।

🔹 मुख्य जानकारी एक नजर में

विवरणजानकारी
पीड़िताराधिका यादव (25 वर्ष), राष्ट्रीय टेनिस खिलाड़ी
आरोपीदीपक यादव (पिता)
स्थानसेक्टर 57, गुरुग्राम
समयसुबह 10:30 बजे, 10 जुलाई 2025
कारणबेटी की टेनिस अकादमी बंद कराने का दबाव, समाजिक तानों से आहत
स्थितिराधिका की मौके पर ही मौत, आरोपी गिरफ्तार

यह घटना इस बात का दर्दनाक उदाहरण है कि किस तरह पुरुष अहम और समाजिक ताने कभी-कभी एक बेटी की जान तक ले सकते हैं। राधिका की मौत केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि समाज के उन ढांचों पर सवाल है जहाँ बेटी की सफलता भी ‘गर्व का बोझ’ बन जाती है।


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