फाइलेरिया : मौन लेकिन आजीवन पीड़ा देने वाला रोग, प्री-TAS और नाइट ब्लड सर्वे से उन्मूलन की निर्णायक तैयारी
राहुल कुमार, सारस न्यूज़, किशनगंज।
फाइलेरिया एक गंभीर वेक्टर जनित रोग है, जो संक्रमित मच्छरों के माध्यम से फैलता है और वर्षों तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर में पनपता रहता है। समय रहते इसकी पहचान और रोकथाम नहीं होने पर यह रोग हाथीपांव (एलिफेंटियासिस), हाइड्रोसील जैसी स्थायी शारीरिक विकृतियों का कारण बनता है। इससे पीड़ित व्यक्ति न केवल शारीरिक रूप से अक्षम हो जाता है, बल्कि उसे सामाजिक उपेक्षा और आर्थिक संकट का भी सामना करना पड़ता है। इसी गंभीरता को देखते हुए सरकार द्वारा फाइलेरिया के पूर्ण उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत आगामी प्री-ट्रांसमिशन असेसमेंट सर्वे (प्री-TAS) एवं नाइट ब्लड सर्वे की तैयारियों को लेकर ठाकुरगंज प्रखंड कार्यालय स्थित ब्लॉक मीटिंग हॉल में ब्लॉक समन्वय समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता माननीय प्रखंड विकास पदाधिकारी, ठाकुरगंज द्वारा की गई।
प्री-TAS और नाइट ब्लड सर्वे : कैसे तय होती है उन्मूलन की वास्तविक स्थिति
प्रखंड विकास पदाधिकारी अहमर अब्दाली ने बैठक में बताया कि प्री-TAS एक वैज्ञानिक आकलन प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से यह जांच की जाती है कि किसी क्षेत्र में फाइलेरिया संक्रमण का स्तर उन्मूलन मानकों के अनुरूप कम हो चुका है या नहीं। इसी प्रक्रिया का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा नाइट ब्लड सर्वे है, जिसमें रात्रि के समय चयनित व्यक्तियों के रक्त नमूनों की जांच की जाती है, क्योंकि फाइलेरिया के परजीवी रात के समय ही रक्त में सक्रिय अवस्था में पाए जाते हैं। यह सर्वे संक्रमण की वास्तविक स्थिति का सबसे विश्वसनीय संकेतक माना जाता है।
आमजन को क्या लाभ और जागरूकता क्यों आवश्यक
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अखलाकुर रहमान ने स्पष्ट किया कि प्री-TAS और नाइट ब्लड सर्वे की सफलता से क्षेत्र को फाइलेरिया मुक्त घोषित करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा। इससे भविष्य में नए मामलों पर रोक लगेगी, आने वाली पीढ़ियों को इस रोग की पीड़ा से मुक्ति मिलेगी तथा परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक और सामाजिक बोझ भी कम होगा। आमजन की जागरूकता इसलिए आवश्यक है, ताकि लोग सर्वे टीमों का सहयोग करें, किसी प्रकार के भय या भ्रम से दूर रहें और इस अभियान को अपना मानकर सहभागी बनें।
फाइलेरिया उन्मूलन में प्री-TAS और नाइट ब्लड सर्वे की भूमिका पर सिविल सर्जन की स्पष्ट बात
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि फाइलेरिया केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि यह व्यक्ति के पूरे जीवन को प्रभावित करने वाला रोग है। प्री-TAS और नाइट ब्लड सर्वे यह सुनिश्चित करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया है कि क्षेत्र में संक्रमण की श्रृंखला वास्तव में टूट चुकी है। नाइट ब्लड सर्वे इसलिए आवश्यक है, क्योंकि इसी समय परजीवी की सही पहचान संभव होती है। इन गतिविधियों की सफलता से आने वाली पीढ़ियों को इस गंभीर रोग से स्थायी राहत मिलेगी। इसमें आमजन का सहयोग और जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है।
प्रशासनिक समन्वय और जनसहभागिता पर प्रखंड विकास पदाधिकारी का संदेश
बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी ने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह प्रशासन और समाज की साझा जिम्मेदारी है। प्री-TAS और नाइट ब्लड सर्वे के सफल आयोजन के लिए प्रशासनिक स्तर पर सभी आवश्यक संसाधन और सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने आमजन से अपील की कि वे सर्वे टीमों को पूरा सहयोग दें, ताकि यह अभियान पूरी तरह सफल हो सके।
वैज्ञानिक सर्वे, सटीक डेटा और गुणवत्ता पर वीबीडीसीओ का जोर
वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. मंजर आलम ने कहा कि नाइट ब्लड सर्वे प्री-TAS का सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी घटक है। इसमें प्रशिक्षित टीमों द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार रक्त नमूने लिए जाते हैं और डेटा की शुद्धता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। यह प्रक्रिया प्रमाणित करती है कि फाइलेरिया का संचरण वास्तव में रुक चुका है।
बैठक का उद्देश्य फाइलेरिया रोग, प्री-TAS एवं नाइट ब्लड सर्वे से जुड़ी सही जानकारी आमजन तक पहुँचाना तथा समुदाय को उन्मूलन अभियान से सक्रिय रूप से जोड़ना रहा। बैठक के अंत में यह निर्णय लिया गया कि सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए प्री-TAS एवं नाइट ब्लड सर्वे की गतिविधियों को सफल बनाएंगे, जिससे ठाकुरगंज प्रखंड को फाइलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में ठोस और स्थायी प्रगति सुनिश्चित की जा सके।
फाइलेरिया : मौन लेकिन आजीवन पीड़ा देने वाला रोग, प्री-TAS और नाइट ब्लड सर्वे से उन्मूलन की निर्णायक तैयारी
राहुल कुमार, सारस न्यूज़, किशनगंज।
फाइलेरिया एक गंभीर वेक्टर जनित रोग है, जो संक्रमित मच्छरों के माध्यम से फैलता है और वर्षों तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर में पनपता रहता है। समय रहते इसकी पहचान और रोकथाम नहीं होने पर यह रोग हाथीपांव (एलिफेंटियासिस), हाइड्रोसील जैसी स्थायी शारीरिक विकृतियों का कारण बनता है। इससे पीड़ित व्यक्ति न केवल शारीरिक रूप से अक्षम हो जाता है, बल्कि उसे सामाजिक उपेक्षा और आर्थिक संकट का भी सामना करना पड़ता है। इसी गंभीरता को देखते हुए सरकार द्वारा फाइलेरिया के पूर्ण उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत आगामी प्री-ट्रांसमिशन असेसमेंट सर्वे (प्री-TAS) एवं नाइट ब्लड सर्वे की तैयारियों को लेकर ठाकुरगंज प्रखंड कार्यालय स्थित ब्लॉक मीटिंग हॉल में ब्लॉक समन्वय समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता माननीय प्रखंड विकास पदाधिकारी, ठाकुरगंज द्वारा की गई।
प्री-TAS और नाइट ब्लड सर्वे : कैसे तय होती है उन्मूलन की वास्तविक स्थिति
प्रखंड विकास पदाधिकारी अहमर अब्दाली ने बैठक में बताया कि प्री-TAS एक वैज्ञानिक आकलन प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से यह जांच की जाती है कि किसी क्षेत्र में फाइलेरिया संक्रमण का स्तर उन्मूलन मानकों के अनुरूप कम हो चुका है या नहीं। इसी प्रक्रिया का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा नाइट ब्लड सर्वे है, जिसमें रात्रि के समय चयनित व्यक्तियों के रक्त नमूनों की जांच की जाती है, क्योंकि फाइलेरिया के परजीवी रात के समय ही रक्त में सक्रिय अवस्था में पाए जाते हैं। यह सर्वे संक्रमण की वास्तविक स्थिति का सबसे विश्वसनीय संकेतक माना जाता है।
आमजन को क्या लाभ और जागरूकता क्यों आवश्यक
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अखलाकुर रहमान ने स्पष्ट किया कि प्री-TAS और नाइट ब्लड सर्वे की सफलता से क्षेत्र को फाइलेरिया मुक्त घोषित करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा। इससे भविष्य में नए मामलों पर रोक लगेगी, आने वाली पीढ़ियों को इस रोग की पीड़ा से मुक्ति मिलेगी तथा परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक और सामाजिक बोझ भी कम होगा। आमजन की जागरूकता इसलिए आवश्यक है, ताकि लोग सर्वे टीमों का सहयोग करें, किसी प्रकार के भय या भ्रम से दूर रहें और इस अभियान को अपना मानकर सहभागी बनें।
फाइलेरिया उन्मूलन में प्री-TAS और नाइट ब्लड सर्वे की भूमिका पर सिविल सर्जन की स्पष्ट बात
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि फाइलेरिया केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि यह व्यक्ति के पूरे जीवन को प्रभावित करने वाला रोग है। प्री-TAS और नाइट ब्लड सर्वे यह सुनिश्चित करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया है कि क्षेत्र में संक्रमण की श्रृंखला वास्तव में टूट चुकी है। नाइट ब्लड सर्वे इसलिए आवश्यक है, क्योंकि इसी समय परजीवी की सही पहचान संभव होती है। इन गतिविधियों की सफलता से आने वाली पीढ़ियों को इस गंभीर रोग से स्थायी राहत मिलेगी। इसमें आमजन का सहयोग और जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है।
प्रशासनिक समन्वय और जनसहभागिता पर प्रखंड विकास पदाधिकारी का संदेश
बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी ने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह प्रशासन और समाज की साझा जिम्मेदारी है। प्री-TAS और नाइट ब्लड सर्वे के सफल आयोजन के लिए प्रशासनिक स्तर पर सभी आवश्यक संसाधन और सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने आमजन से अपील की कि वे सर्वे टीमों को पूरा सहयोग दें, ताकि यह अभियान पूरी तरह सफल हो सके।
वैज्ञानिक सर्वे, सटीक डेटा और गुणवत्ता पर वीबीडीसीओ का जोर
वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. मंजर आलम ने कहा कि नाइट ब्लड सर्वे प्री-TAS का सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी घटक है। इसमें प्रशिक्षित टीमों द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार रक्त नमूने लिए जाते हैं और डेटा की शुद्धता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। यह प्रक्रिया प्रमाणित करती है कि फाइलेरिया का संचरण वास्तव में रुक चुका है।
बैठक का उद्देश्य फाइलेरिया रोग, प्री-TAS एवं नाइट ब्लड सर्वे से जुड़ी सही जानकारी आमजन तक पहुँचाना तथा समुदाय को उन्मूलन अभियान से सक्रिय रूप से जोड़ना रहा। बैठक के अंत में यह निर्णय लिया गया कि सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए प्री-TAS एवं नाइट ब्लड सर्वे की गतिविधियों को सफल बनाएंगे, जिससे ठाकुरगंज प्रखंड को फाइलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में ठोस और स्थायी प्रगति सुनिश्चित की जा सके।
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