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बिंदु अग्रवाल की कविता #89 – शीर्षक-“तुम्हें भूल कहाँ पाते हैं”।

सारस न्यूज़, वेब डेस्क।

आँखो में तेरे ख्वाब लिए होठों पर तेरी बात लिए
हाथों में तेरा हाथ लिए हम यूँ ही जिए जाते हैं
तुम्हें भूल कहाँ पाते हैं..?

कुछ मीठे एहसास लिए फिर मिलने की आस लिए
कुछ दिल के जज्बात लिए, हम यूँ ही जिए जाते हैं
तुम्हें भूल कहाँ पाते हैं..?

कुछ मुरझाई सी भोर लिए,कुछ ढलती सी शाम लिए,
दिल में यादों का दीप जला, कुछ जागी सी रात लिए हम यूँ ही जिए जाते हैं तुम्हें भूल कहाँ पाते हैं..?

दिल में तेरा दर्द लिए, भीगी सी पलकें सर्द लिए अरमानों को सेज बना,नित नूतन स्वप्न सजाते हैं
तुम्हें भूल कहाँ पाते हैं..?

तेरी जुदाई का गम है, यादें जीवन का मरहम है,
खाबो खयालो में अक्सर हम, तुमसे मिलने आते हैं
हम यूँ ही जिए जाते हैं, तुम्हें भूल कहाँ पाते हैं..?

                                  -- बिन्दु अग्रवाल 

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