सारस न्यूज़, वेब डेस्क।
देशभर में फैल रहे साइबर फ्रॉड के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसमें बिहार के सिम कार्ड का इस्तेमाल कर ठगी की जा रही थी। जांच में इस पूरे रैकेट का कनेक्शन बिहार के वैशाली जिले से जुड़ा सामने आया है, जो अंतरराष्ट्रीय गिरोह से भी लिंक रखता है।
केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन “चक्र” के तहत इस मामले की जांच तेज की गई है। इस दौरान यह पाया गया कि बड़ी संख्या में फर्जी या अवैध तरीके से लिए गए सिम कार्ड साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए जा रहे थे, जिनका उपयोग देशभर में ठगी के लिए किया जा रहा था।
जांच में खुलासा हुआ कि कुछ पॉइंट ऑफ सेल (POS) एजेंट नियमों का उल्लंघन कर बिना सही वेरिफिकेशन के सिम जारी कर रहे थे। यही सिम कार्ड बाद में “डिजिटल अरेस्ट”, फर्जी लोन, निवेश ठगी जैसे अपराधों में इस्तेमाल हो रहे थे।
सीबीआई की कार्रवाई के दौरान देश के कई राज्यों में एक साथ छापेमारी की गई। करीब 45 ठिकानों पर जांच के बाद कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें सिम उपलब्ध कराने वाले एजेंट भी शामिल हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस गिरोह ने हजारों की संख्या में अवैध सिम कार्ड जुटाए और उन्हें साइबर अपराधियों तक पहुंचाया। इसके लिए बैंक खातों के जरिए लाखों रुपये का लेन-देन भी किया गया, जिससे यह साफ होता है कि यह नेटवर्क काफी संगठित और बड़े स्तर पर संचालित हो रहा था।
अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जुड़े हुए हैं। ऐसे में जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क के अन्य सदस्यों और विदेशी कनेक्शन की भी पड़ताल कर रही हैं।
इस कार्रवाई से साफ है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ अब एजेंसियां सिर्फ अपराध करने वालों पर ही नहीं, बल्कि उन्हें संसाधन उपलब्ध कराने वाले पूरे नेटवर्क पर भी सख्ती से कार्रवाई कर रही हैं।
