सारस न्यूज़, वेब डेस्क।
मध्य प्रदेश के खंडवा के रहस्यमय खुलासे में दस दशक से अधिक का एक डरावना नेटवर्क उजागर हुआ है। स्थानीय पुलिस ने बताया कि यहां के होटलों, ढाबों और सड़क-किनारे के स्नैक्स पॉइंट्स तक 2015 से “घी” के नाम पर जानवरों की चर्बी फैलती रही। इसके पीछे विकृत धंधा था – भैंस, गाय, या अन्य जानवरों की हड्डियां और खाल जलाकर चर्बी निकाली जाती थी, जिसे भरोसेमंद घी की तरह बाजार में बेचा जाता था। यह ट्रैफिक इतना व्यवस्थित था कि जनता इसे “प्रसाद” या स्वादिष्ट घी मानकर खाती रही, जबकि फूड एंड ड्रग्स (FSSAI) की नींद दस वर्षों तक लगातार सोती रही।
2015 से शुरू हुआ चर्बी धंधा
खंडवा के गो-संकर या अन्य निकले जानवरों की हड्डियां और खालें निकटस्थ किसानों और बटररी‑संचालकों द्वारा इकट्ठा की जाती थीं। इन्हें गहने‑बाजार या गोदामों में जमा किया जाता था, जहां गर्म भट्टी में जलाकर चर्बी निकाली जाती थी। यह चर्बी कच्चे रूप में घनी और गंधित होती थी, लेकिन उसे फिल्टर करके शुद्ध घी की तरह पैक किया जाता था। इस प्रक्रिया में रासायनिक शुद्धिकरण भी शामिल था, जिससे गंध और रंग ढंग से छुपाया जाता था। यह उत्पाद 2015 से होटलों, ढाबों, और तीर्थ‑स्थलों के प्रसाद‑केटरिंग सर्विसेस तक पहुंचता रहा।
FSSAI की नींद और जनता की अज्ञानता
खंडवा की स्थानीय प्रशासन ने फूड सेफ्टी एंड स्टैण्डर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) पर लगातार आरोप लगाए हैं कि वे 2015 से 2026 तक इस धंधे के बारे में लागt -ता से अज्ञात रहे। नियमित नमूनाकरण और लैब टेस्टिंग की कमी ने इस चर्बी को नियमित रूप से बाजार में फैलने का रास्ता बनाया। जब तक एक स्थानीय गो-संकर संगठन ने 2025 में गोपनीय शिकायत दर्ज की, FSSAI ने न तो कोई बड़ी जांच शुरू की और न ही खंडवा के रेस्टोरेंट्स को टारगेट किया। इस बीच जनता ने इस घी को “होम‑मेड” या “देशी” घी मानकर खाया, क्योंकि यह स्वादिष्ट और सस्ता था।
खुलासे के बाद जांच और जुर्माना
2026 के शुरुआत में खंडवा की पुलिस ने एक गुप्त ऑपरेशन चलाकर चार बाजारों और दो बड़े केटरिंग सर्विसेस पर छापा मारा। यहां से 1200 किलो चर्बी‑युक्त “घी” जब्त किया गया, जिसकी लैब रिपोर्ट ने पुष्टि की कि यह निश्चित रूप से जानवरों की हड्डियां और खाल से बनाया गया था। FSSAI ने अब यह घोषणा की है कि जिम्मेदार डिज़्डि निकायों के खिलाफ 2 करोड़ रुपये का जुर्माना और लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। खंडवा के जिला कलेक्टर ने कहा कि यह खुलासा देशव्यापी चेतावनी है, और भविष्य में नियमित ऑडिट और डिजिटल ट्रैसिबिलिटी (QR कोड) लागू की जाएगी।
जनता के प्रति संदेश
इस घटना ने देश भर में भोजन सुरक्षा के मुद्दों को फिर जगाया है। खंडवा के लोग निराश और चिंतित हैं, जिन्होंने दस साल तक इस “प्रसाद” को खाया। स्थानीय आयुर्वेद विशेषज्ञ ने चेतावनी दी है कि ऐसी चर्बी में लीड और अन्य भारी धातुएं हो सकती हैं, जो लंबे समय तक खाने से गुर्दे और हृदय को नुकसान पहुंचा सकती हैं। अब खंडवा के निवासी फूड हैब, ऑनलाइन फूड डिलीवरी और विश्वसनीय ब्रांड्स की ओर झुक रहे हैं, लेकिन यह घटना उनके विश्वास को काफी झटका दे गई है।
