बिंदु अग्रवाल की कविता # 39 (शीर्षक:- मां…)
Post Views: 485 विजय कुमार गुप्ता, सारस न्यूज, गलगलिया। मां मैंने उसे कभी चैन से सोते नहीं देखा।मजबूरी का रोना कभी रोते नहीं देखा।।हर वक्त थामे रहती थी वह पतवार…
बिंदु अग्रवाल की कविता # 38 (शीर्षक:- कविता बन जाती है…)
Post Views: 512 विजय कुमार गुप्ता, सारस न्यूज, गलगलिया। कविता बन जाती है… मैं नही लिखती..लिखाई मुझे कबरास आती है…?जब भी उमड़ता हैकोई भाव मेरे अंदरमेरी भावनाएं कविताबन जाती है………
बिंदु अग्रवाल की कविता # 37 (शीर्षक:- बदलना जरूरी है)।
Post Views: 442 विजय कुमार गुप्ता, सारस न्यूज, गलगलिया। बदलना जरूरी है वक्त के साथ बदलना जरूरी हैपर बदल कर संभलना जरूरी है । ब्याधियां लग जाती है अक्सर शरीर…
बिंदु अग्रवाल की कविता # 36 (शीर्षक:- धीरे-धीरे भूलना हमें)।
Post Views: 569 विजय कुमार गुप्ता, सारस न्यूज, गलगलिया। धीरे-धीरे भूलना हमें भूल जाओ तुम हमेंयह तुम्हारे दिल की बात है,पर हाँ! धीरे-धीरे भूलना हमेंजैसे धीरे धीरे घर बनाए होमेरे…
नये वर्ष के गीत लिखें
Post Views: 358 विजय गुप्ता, सारस न्यूज़, गलगलिया। आओ हम मनमीत लिखेंकुछ नये वर्ष के गीत लिखें।कुछ घाव लिखें बीते कल केकुछ आगत कल की प्रीत लिखें।। जो भूल गए…
बिंदु अग्रवाल की कविता # 35 (बदलते एहसास)
Post Views: 330 विजय कुमार गुप्ता, सारस न्यूज, गलगलिया। बदलते एहसास चारों ओर बसदुश्मनी का मंजर है,हर किसी के हाथ मेंनफरतों का खंजर है,न जाने कहाँ गुम हो गईप्रेम के…
अंतरमन के भाव
Post Views: 278 सारस न्यूज, गलगलिया, किशनगंज। कभी धूप लिखी ,कभी छांव लिखाकभी अंतरमन का भाव लिखा।कभी हँसी,ठिठोली , गीत लिखेकभी बीते समय का घाव लिखा।। कभी जीवन का उतार…
बिंदु अग्रवाल की कविता # 34 (मैं नारी हूँ)
Post Views: 461 विजय कुमार गुप्ता, सारस न्यूज, गलगलिया। मैं नारी हूँ नारी हूँ मैं, नारी हूँजब अपनी जिद पे आती हूँ,पर जाती सबपे भारी हूँमैं नारी हूँ। मैं दुर्गा…
बिंदु अग्रवाल की कविता # 33 (धरती पुत्र)
Post Views: 409 विजय कुमार गुप्ता, सारस न्यूज, गलगलिया। धरती पुत्र आज मैंने कोई प्रेम का गीत नही लिखाआज मैंने तुम्हें अपना मनमीत नही लिखा,आज हृदय द्रवित था देख वह…
बिंदु अग्रवाल की कविता # 32 (सुनो पथिक)
Post Views: 511 विजय कुमार गुप्ता, सारस न्यूज, गलगलिया। सुनो पथिक हो पंथ पथरीला, सुनो पथिक!तुम रुक ना जाना राहों में…।मंजिल मिलती है सदा ही,मुश्किलों की बाहों में।। मेहनत से…
बिंदु अग्रवाल की कविता # 31 (भाग्य के भरोसे)
Post Views: 648 विजय कुमार गुप्ता, सारस न्यूज, गलगलिया। भाग्य के भरोसे यूं रोना अपने भाग्य का रोते रहोगे कब तलकरह भरोसे भाग्य के सोते रहोगे कब तलक।जीवन के अनमोल…
बिंदु अग्रवाल की कविता # 30 (कविता बन जाती है)
Post Views: 520 सारस न्यूज, गलगलिया, किशनगंज। मैं नही लिखती..लिखाई मुझे कबरास आती है…?जब भी उमड़ता हैकोई भाव मेरे अंदरमेरी भावनाएं कविताबन जाती है…… वही समझेगा इन शब्दों कोजो इन…
