• Fri. Apr 3rd, 2026

Saaras News - सारस न्यूज़ - चुन - चुन के हर खबर, ताकि आप न रहें बेखबर

कविता

  • Home
  • बिंदु अग्रवाल की कविता # 29 (मुझमें नही है धैर्य राम सा)

बिंदु अग्रवाल की कविता # 29 (मुझमें नही है धैर्य राम सा)

Post Views: 409 विजय गुप्ता, सारस न्यूज, गलगलिया। रूठी क्यों दुखहरणी माताकैसे मैं तुझे मनाऊं?कैसी विकट प्रतीक्षा की हैकैसे मैं तुझे बताऊं? ना जानूं मैं जप तप ध्यानाकैसे तुझे रिझाऊं?मुझमें…

बिंदु अग्रवाल की कविता # 28 (समय की ताकत)

Post Views: 410 विजय गुप्ता, सारस न्यूज, गलगलिया। समय की ताकत समय बड़ा बलवान जगत में,सबको यही बताता है।समय का पहिया अपने पथ पे,सदा ही चलता जाता है। समय कराता…

बिंदु अग्रवाल की कविता # 27 (मेरी बिटिया)

Post Views: 470 विजय गुप्ता, सारस न्यूज, गलगलिया। मेरी बिटियादेख के उसके मुखड़े को,दिल बाग-बाग हो जाता है। उस मधुर मिलन की बेला का,सुखद एहसास हो जाता है। जब आई…

बिंदु अग्रवाल की कविता # 26 (हिंदी भारत का गौरव गान है)

Post Views: 720 विजय गुप्ता, सारस न्यूज, गलगलिया। हिंदी भारत का गौरव गान है हिंदी हमारी शान हैहमारे देश का यह मान है,प्रेम सुधा रस पान करतीभारत का गौरव गान…

मैं राधा बन जाऊं।

Post Views: 475 विजय गुप्ता, सारस न्यूज, गलगालिया। कान्हा कान्हा मैं करूँमैं राधा बन जाऊँ,कान्हा मेरा सांवराकान्हा संग प्रीत लगाऊँ। कान्हा तेरे होठों कीमैं मुरली बन जाऊँ,तेरे संग -संग मैं…

बिंदु अग्रवाल की कविता # 25 (यह देश है उन मतवालों का)

Post Views: 529 विजय गुप्ता, सारस न्यूज, गलगलिया। यह देश है उन मतवालों का यह देश है उन रखवालों काआजादी के मतवालों का,रखने को शान तिरंगे कीजिन लोगों ने जान…

बिंदु अग्रवाल की कविता # 23 (भारत और भ्रष्टाचार)

Post Views: 494 विजय गुप्त, सारस न्यूज़, गलगलिया। भारत और भ्रष्टाचार कभी-कभी सोचने कोमजबूर हो जाती हूं,कहाँ है इक्कीसवीं सदी काभारत? कहाँ है? आजाद भारत मेंक्या सचमुच आजाद हैं हम?तन…

बिंदु अग्रवाल की कविता # 22 (बदलना जरूरी है)

Post Views: 435 विजय गुप्ता, सारस न्यूज, गलगलिया। बदलना जरूरी है वक्त के साथ बदलना जरूरी हैपर बदल कर संभलना जरूरी है । ब्याधियां लग जाती है अक्सर शरीर मेंसुबह…

बिंदु अग्रवाल की कविता # 21 (टके में बिकता है ईमान)

Post Views: 503 विजय गुप्ता, सारस न्यूज, गलगलिया। हर काम के लगते दाम यहांहर चीज मोल पे मिलती है,अगर गांठ में पैसा हो तोइंसानियत भी बिकती है। बिक जाते हैं…

बिंदु अग्रवाल की कविता # 20 (मत बांधों मेरे पँखों को)

Post Views: 410 विजय गुप्ता, सारस न्यूज, गलगलिया। मत बाँधों मेरे पंखों कोमुझे उन्मुक्त गगन में उड़ने दो मत बांधों मेरे पँखों को,मुझे उन्मुक्त गगन में उड़ने दो।अभी जरा बचपन…

बिंदु अग्रवाल की कविता #19 (गवाँर)।

Post Views: 341 विजय गुप्ता, सारस न्यूज़, गलगलिया। मैंने सम्हाल कर रखा हैअपनी सभ्यता को आजतक,मैं आज भी बड़ो के चरणों मेंशीश नवाता हूँ। मैंने जाना है मोलअनमोल माटी कामैं…

बिंदु अग्रवाल की कविता #18 (मजदूर की मजबूरी)

Post Views: 1,382 विजय गुप्ता, सारस न्यूज, गलगलिया। वो चल पड़ा अपने कर्म के पथ परलिए अपने हुनर का नूर,अपने घर परिवार से दूरकिसी अनजान के बीच सुदूर। किसी शहर…