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जल-नल योजना – भरगामा, धनेश्वरी पंचायत वार्ड 3 में दस दिन से नहीं आ रहा पानी। मिस्त्री या अधिकारी नहीं सुन रहा कोई ग्रामीण की शिकायत।

प्रतिनिधि, सारस न्यूज़, अररिया।

जल नल योजना बिहार सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है, लेकिन इसे लागू करने में इस तरह की समस्याएं सामने आई हैं कि अधिकतर लोग इसका लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। इसका एक उदाहरण भरगामा ब्लॉक के धनेश्वरी पंचायत के वार्ड नंबर 3 का है, जहां पिछले 10 दिनों से नल खराब है। मिस्त्री को बार-बार कॉल करने के बावजूद वह 10 दिनों से नहीं आया है। ग्रामीणों को यह भी जानकारी नहीं है कि वे अपनी शिकायत किससे करें और कौन उनकी समस्या सुनेगा। पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि यह कहते नजर आते हैं कि सिर्फ इस वार्ड का ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार में योजना की यही स्थिति है।

इस मामले में जब हमने पूर्व सरपंच मिथिलेश राम से बात की, तो उन्होंने इस मुद्दे को देखने और समाधान दिलाने का भरोसा दिलाया।

बिहार में शुरू की गई ‘जल नल योजना’ का उद्देश्य हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना था, लेकिन योजना की विफलता ने सरकार और प्रशासन की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस योजना की शुरुआत बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2016 में ‘हर घर नल का जल’ नाम से की थी, जिसका लक्ष्य राज्य के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सभी घरों को नल के माध्यम से साफ पानी उपलब्ध कराना था। हालांकि, योजना की शुरुआत बड़े पैमाने पर की गई थी, लेकिन इसे जिस तरह से क्रियान्वित किया गया, उसमें कई समस्याएं सामने आईं।

योजना का लक्ष्य और अपेक्षाएं

‘जल नल योजना’ के तहत राज्य के सभी घरों को नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य था। इस योजना से न केवल स्वास्थ्य में सुधार की उम्मीद थी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के जल-संबंधी कार्यों के बोझ को भी कम करने का इरादा था। सरकार का दावा था कि इससे ग्रामीण निवासियों को स्वच्छ पेयजल प्राप्त होगा, जिससे जलजनित बीमारियों में कमी आएगी और लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा।

1. भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन

योजना में सबसे बड़ी समस्या भ्रष्टाचार रही है। विभिन्न स्तरों पर ठेकेदारों, अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों के बीच मिलीभगत के कारण इस योजना में व्यापक भ्रष्टाचार हुआ। कई स्थानों पर घटिया पाइपलाइन और सामग्री का इस्तेमाल किया गया, जिसके कारण पानी की गुणवत्ता खराब हो गई। कहीं पाइपलाइनों में लीकेज की समस्या बनी रही, तो कहीं योजनाएं अधूरी रह गईं।

2. असमान वितरण

कई गांवों में पानी की सप्लाई या तो बहुत सीमित है या पूरी तरह से बंद है। जहां सप्लाई है भी, वहां अक्सर जल की गुणवत्ता अत्यधिक खराब पाई गई है, जिससे ग्रामीणों को शुद्ध पानी के बजाय प्रदूषित पानी मिल रहा है। इस असमानता ने योजना की सफलता पर गंभीर प्रभाव डाला है।

3. तकनीकी खामियां

पानी की पाइपलाइनों का नेटवर्क, खासकर ग्रामीण इलाकों में, ठीक से स्थापित नहीं किया गया। इसके अलावा, कई गांवों में पानी की टंकी या मोटर का रखरखाव नहीं होने के कारण लोगों को पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। पाइपों में लीकेज, मोटर की खराबी और टैंकों की सफाई न होना, ये सभी समस्याएं जल आपूर्ति को बाधित कर रही हैं।

4. पानी की गुणवत्ता की समस्या

योजना के तहत जिन स्थानों पर पानी पहुंचाया जा रहा है, वहां पानी की गुणवत्ता गंभीर चिंता का विषय है। कई जगहों पर पानी में आर्सेनिक, फ्लोराइड और अन्य हानिकारक तत्वों की अधिकता पाई गई है। साफ पानी की जगह दूषित पानी मिलने से ग्रामीणों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

5. जनजागरूकता की कमी

ग्रामीण क्षेत्रों में इस योजना के प्रति लोगों में जागरूकता की भी कमी है। कई स्थानों पर लोगों को नल का पानी उपयोग करने के प्रति भरोसा नहीं है, जिसके कारण वे पुरानी पद्धतियों जैसे कुएं या तालाब का पानी ही उपयोग कर रहे हैं। इस तरह की मानसिकता भी योजना की सफलता में बाधा बन रही है।

हालांकि सरकार इस योजना को सफल बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर हो रही समस्याएं बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। बिहार सरकार को योजना की सफलता के लिए निम्नलिखित सुधार करने होंगे:

भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई: योजना से जुड़े अधिकारियों और ठेकेदारों पर निगरानी और सख्त कार्रवाई आवश्यक है ताकि भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जा सके।

तकनीकी सुधार: पाइपलाइनों और जल आपूर्ति प्रणालियों की मरम्मत और रखरखाव को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

पानी की गुणवत्ता में सुधार: पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच होनी चाहिए ताकि दूषित पानी के कारण होने वाली बीमारियों से बचा जा सके।

जनजागरूकता अभियान: ग्रामीण इलाकों में जागरूकता कार्यक्रम चलाने की आवश्यकता है ताकि लोग नल के पानी का उपयोग सही तरीके से कर सकें और इसके फायदों को समझ सकें।

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