सारस न्यूज़, किशनगंज।
टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को तेज करने के लिए स्वास्थ्य विभाग अब ऐसे स्थानों तक भी सक्रिय रूप से पहुंच रहा है, जहां संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। इसी कड़ी में 100 दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान के तहत जिला कारा किशनगंज में विशेष जागरूकता और स्वास्थ्य जांच कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस पहल का उद्देश्य बंद और भीड़भाड़ वाले वातावरण में रहने वाले लोगों को टीबी और एड्स जैसी गंभीर बीमारियों के प्रति जागरूक करना और उन्हें समय पर जांच व उपचार से जोड़ना है।
कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य अधिकारियों की टीम ने कारा पहुंचकर बंदियों को टीबी और एड्स से बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्हें बताया गया कि यदि लंबे समय तक खांसी, बुखार, वजन कम होना जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत जांच कराएं। समय पर पहचान और नियमित इलाज से टीबी को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
इस दौरान जेल में इलाज करा रहे टीबी के मरीजों की स्थिति का भी जायजा लिया गया। अधिकारियों ने दवा सेवन की नियमितता, स्वास्थ्य में सुधार और पोषण संबंधी जरूरतों की जानकारी ली। साथ ही यह सुनिश्चित किया गया कि मरीजों को निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार सभी आवश्यक सुविधाएं मिल रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यह अभियान अब केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन जगहों पर भी फोकस किया जा रहा है जहां संक्रमण फैलने की संभावना ज्यादा रहती है। कारागार जैसे स्थानों में नियमित जांच और जागरूकता बेहद जरूरी है, ताकि बीमारी को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।
विशेषज्ञों ने जोर दिया कि टीबी और एड्स जैसी बीमारियों से बचाव के लिए जागरूकता और समय पर इलाज सबसे अहम है। यदि मरीज नियमित रूप से दवा लेते रहें और जांच कराते रहें, तो टीबी को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है।
इस पहल के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है कि समाज का कोई भी वर्ग स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रहे। टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ऐसे समावेशी प्रयासों को और मजबूत किया जा रहा है।
